Popular Posts
-
जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
-
गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
-
वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
-
नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
-
यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
-
लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
About
Random Posts
News
Design
Pages
About Me
Popular Posts
-
जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
-
गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
-
वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
-
नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
-
यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
-
लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
हरपल मुस्कराने वाली
कभी न घबराने वाली
दिखती नही चिंता कभी
रहे सदा चेहरे पर लाली
था अनजान उससे मैं
न जाने कहाँ से वो आयी
नही था नाता कोई पुराना
पर दिलों दिमाग पर छाई
भर दिया मन खुशियों से
जो था कब से मेरा खाली
दिखता नही ..................
लिये सात फेरे संग मेरे
सब कुछ संग मिला लिया
जो थी चाहते,सपने अपने
सबको उसने भुला दिया
नही छोड़ा सूखापन कहीं
कर दी चहुंओर हरियाली
दिखती नही ................
सजती है वो मेरे लिये ही
माँग में सिंदूर भी सजाती है
नही थकती कभी भी वो
कुछ न कुछ करती जाती है
खिलाती है भरपेट सभी को
चाहेखाली रहे खुद की थाली
दिखती नही ...................
कैसे बना ये रिश्ता हमारा
कैसे ये हमारी हुई पहचान
अनजाने पंछी दो ये ,कैसे
बन गये एक दूजे की जान
चहुंओर जीवन में प्रकाश
संजू बीत गयी रात काली
दिखती नही चिंता कहीं
रहे सदा चेहरे पर लाली
हरपल मुस्कराने वाली
कभी न घबराने वाली
दिखती नही चिंता कहीं
रहे सदा चेहरे पर लाली

0 comments:
Post a Comment