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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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आज फ़िर आ जाओ भ्रमरो
इन अधखिले फूलों पर
मधुर आवाज़ से गुंजा दो
इस शांत से उपवन को
जब से तुम गये हो
सब कुछ वीरां हो गया है
रहता था जो हर्षौल्लास
न जाने कहाँ खो गया है
खामोश पड़े है फूल कलियाँ
तुम बिन अब ये नही महकते है
तुम्हारी गूँजन से थी सब हलचल
अब तो पक्षी भी नही चहकते है
इस उपवन का सन्नाटा
तुम्हे ही हरपल पुकारता है
करके धरती को गरमी से लाल
सूरज गुस्सा अपना उतारता है
रहता सब कुछ शांत यहाँ
अब तो बच्चे भी नही आते है
करते थे कलरव सदा जो
पक्षी भी नही कुछ गाते है
लौट आओ , लौट आओ तुम अब
शायद फ़िर यहाँ बहार आ जाये
उड़ रही है धूल यहाँ सूखी
शायद कोई मधुर बौछार आ जाये
आ जाओ शायद ये कलियाँ
देख तुम्हे फ़िर खिल जाये
बिछड़ गया जो साथ किसी का
शायद यहाँ उसे मिल जाये
सुन लो ओ भ्रमरो तुम
तुम वापिस आ जाओ ना
आये मुस्कान चेहरे पे सबके
कुछ ऐसा तुम गुनगनाओ ना
