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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
Saturday, July 9, 2016
लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में
नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में
कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब
नही तो दुनियाँ डुबो देगी इसे मँझदार में
चलते रहना अकेले अनजान से रास्तों पर
तभी चमक सकता है तेरा नाम अखबार में
ले लो फैंसला जो भी है लेना तुझे आज ही
मत गँवा जिंदगी तेरी इस सोच विचार में
रह लेना चाहे तू कितना भी खुश अकेले
पर असली खुशियाँ तो मिलेंगी परिवार में
चमकते रहना सदा तू ईमानदारी के सहारे
सौदा न करना उज्ज्वल झूठ के बाजार में
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