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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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Wednesday, March 30, 2016
अपना ग्रुप
कौन रहेगा किस समूह में
सब मन ही मन में रट रहे थे
थे सब बैचेन यहाँ क्योंकि
सब चार ग्रूप्स में बँट रहे थे
किसको पता था कि
इंद्राज चुपचाप गाँधी बन जायेगा
सोचा था क्या सूरज ने
बुलबुल पांडे बन लाठी दिखायेगा
सोचा था क्या मेघना ने कि
अनुराधा की सहेली बन जायेगी
क्या पता था कुसुम को कि
वो नेता की सेक्रेटरी बन जायेगी
क्या पता था कि अनुराधा भी
स्टेज पर थप्पड़ चलायेंगी
सोचा था किसी ने कि
शीलू न्यूज रिपोर्टर बन जायेगी
इन्द्र कभी भिखारी बनेगा
या पहली बार कविता सुनायेगा
क्या पता था मुझ जैसा नादां
यहाँ लुकिंग अराउंड का लीडर बन जायेगा
सबने अपनी अपनी भूमिका
अपने ही अंदाज़ में निभाई
बन गया मजबूत ग्रूप ये
क्योंकि नेहा भी इसमें चली आई
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