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जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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वो सात दिन
किसी कोने में है मेथ मेजिक
तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड
क्या उत्सव है आवडी में आज
हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड
कुछ कोनो में चल रहा है फोन
तो कुछ बैठे है बेचारे मौन
कुछ लगते है शरीफ बड़े
तो कुछ लगते है खानदानी डॉन
किसी को यहाँ की हवा भा रही है
किसी को अपने घर की याद आ रही है
कुछ है नादान मुझ से बेचारे
जिन्हे सुबह योगा की चिंता खा रही है
खाना खाकर सब परेशां लग रहे हैं
बारह बजने को हैं पर सब जग रहे हैं
सुबह ही भाग जाये यहाँ से
कुछ के चेहरे तो ऐसे लग रहे हैं
माणिक ने सबकी आँखो पर पट्टी बाँधी
कोई बनेगा भिखारी यहाँ कोई बनेगा गाँधी
कोई बनेगा अँगरेज़,कोई भेंस,कोई पांडे
सन्नाटा होगा कभी, तो कभी हँसी की आँधी
शब्द हैं सबके मन पर जल्दी ये दिन कट जाये
वापिस सब अपने घरो की और बढ़ जाये
पर मानो या न मानो, है सचाई यहीं संजू
इसी कारण सब एक दूजे निकट आये

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