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Saturday, October 24, 2026

 बसने  लगी  बस्तियां  अलग, सब  साथ रह जाते  

छोटी - मोटी  मुशीबतों को,मिलकर हम सह जाते

चहुंओर फैलाकर भाईचारा,करते संग  सब गुजारा
बन एक दूजे का प्यारा, प्रेम की दरिया में बह जाते

सब गले लगके  मिलते, बगीचे के फूलों से खिलते
किसी के हिलाने से न हिलते, इकठ्ठे  यहाँ रह जाते

मानवता का पाठ पढाके,नेक रास्ते सबको चलाके
दूसरों  को  अपने साथ चलाके,बढ़ने की कह जाते

नफ़रत   को  मिटाके,अज्ञानता  का  अँधेरा हटाके
शिक्षा  की ज्योत ज़लाके,संजू   अलग सतह पाते

बसने  लगी  बस्तियां  अलग , सब साथ रह जाते  
छोटी -मोटी   मुशीबतों को,मिलकर हम सह जाते

Friday, July 10, 2026

 कशमश है उँगलियों में

आज फ़िर से ये उँगलियाँ
जाने क्यों कशमशा रही है
चाहती है कुछ लिखना शायद
मन ही मन कुछ ये गा रही है

फूटेंगी ये आज
ज़रूर को रचना बनकर
लिखेंगी कुछ ये पक्का
खुद ही आगे बढ़कर

पड़ा मेज के कोने पे
सफेद पन्ना भी आज तो
यूँ ही फ़ड़फ़ड़ा रहा है
चलाने खुद पर कलम
कब से ये अड़ा जा रहा है

मन में भी अलग ही
उथल पुथल मची है
कुछ होगा नया आज
ये बात तो मन में जंची है

सुबह से ये दिल भी
यूही भटक रहा है
कुछ न कुछ आज तो
पक्का खटक रहा है

बन जायेगा संगम जब
इन सब चीजों का गर
होगा शब्दों का मेल और
दिखेगा सबका असर

शायद वीरां प्रदेश में
कोई बगिया खिलने वाली है
बनाकर कोई रस्ता
चीर कर पहाडों को
कोई नदी निकलने वाली है

शब्दों के मेल से कोई नई
"संजू" लय मिलने वाली है
इस उथल पुथल में से
कोई रचना निकलने वाली है

Wednesday, February 7, 2018

चार  कामों  हम  थोड़े   क्या उलझ गये
तुम  ही  मुझको   बेपरवाह  समझ  गये

तुम ही तो मेरे  आदर्श   और   सहारा थे
फ़िर  तुम्हारी   नज़र  में क्यों आवारा थे

तेरे सपनों के लिये हम  दिनभर भागे थे
देने खुशियाँ सब तुम्हे रातों हम जागे थे

कुछ  कम  चीजों  की तुमको चाहत थी
शायद  इसी   बात की थोड़ी  राहत  थी

पर हम तेरे लिये कुछ  करना  चाहते थे
इसलिये तो खुदको सदा  ऐसा रखते थे

बस इन्ही चीजों की थोड़ी  परेशानी थी
कामयाबी की  रच रहे  नई  कहानी थी

माना  हर  बात हमको तुम्हे बतानी थी
पर किश्ती भीमंजिल तक पहुँचानी थी

पर शायद सोचता हूँ सब कुछ छोड़ दूँ
औरमुँह जिम्मेदारियों की और मोड़ लूँ

चाहूं आज मैं पास  तेरे आना
दे दे किस्मत तू  कोई  बहाना

हर पल तू  क्यों देती  मुझको
दर्द जुदाई का इक  अनजाना

कर यत्न तू   अब  मिलन का
छोड़ दे  अब  यूँ मुझे  सताना

आज ज़रूरत है  उसको मेरी
ज़रूरी है  पास  उसके जाना

जब  मैं  हूँ  सबकुछ  उसका
फ़िर क्यों  बना दिया  बेगाना

खास दिन है ये उसका आज
जो  मुझे साथ उसके मनाना

ए हवा तू ही दे दे साथ आज
पहुँचा दे मेरा खास नजराना

स्वीकार करो   शुभकामनाएँ
और देदो मुझको माफीनामा

जन्मदिवस मुबारक हो मेरे बिना

हमसे  मिलने की  हर   वजहें तुम
यूँ  किस्मत पर न  सब छोड़ा करो

कभी मिलने  की  सोचकर  क़दम
आशियाने की और भी मोड़ा करो

नही चाहते आना गर  दर पे हमारे
रास्तों  को  यूँ   बीच न छोड़ा करो

कभी आ जाना  यूँ टहलते टहलते
हम नही कहते की तुम  दौड़ा करो

बनाते है मुश्किल से  घर यादों का
साफ मना कर  उसे  न फोड़ा करो

मानाआना सम्भव नही तुम्हारा पर
हमारे रस्ते में तो न कोई रोड़ा करो

बड़ी मिन्नतोंसे करते हो कोई वादा
अपने किये वादे को  न तोड़ा करो

एक नये ठिकाने की ओर
उड़ ले पंछी अब तू
जितना नसीब था तेरा यहाँ
जितना वक्त था तेरा यहाँ
सब हुआ वो पूरा
रह गया हो चाहे
कोई काम तेरा अधूरा
तलाश कोई नया पेड़ अब तू
तलाश अब नया पेड़  अब तू

इस बगीचे में तो
कोई आकर बसेगा
सुनकर बाते तेरी कोई
तुझ पर खूब हँसेगा
पर क्या है उससे
फितरत है दुनियाँ की ये
जो गुण गाती है बस पास ही
पीछे से तोड़ती है ये विश्वास ही

पर घबराना मत तू कभी
तूने जो छोड़े है यहाँ निशाँ
वक्त लगेगा लोगों को
उनको बिल्कुल मिटाने में
जो मेहनत की थी तूने
उन निशानों को बनाने में

भूल जाना तू भी
इसको दूसरो की तरह
नये ठिकाने पर लग जाना
नए निशाने बनाने को
क्योंकि लोगों को जरूरत पड़ेगी
नए निशानों को मिटाने की
और कोई तो चीज रहनी चाहिये
तेरे जाने बाद मिटाने की

दिल  में तो  थी  बहुत  बातें  उनके
पर  न  जाने क्यों वो बता ना  सके

किस  बात  की  परवाह थी उनको
जो प्यार  हमसे वो  जता  ना  सके

शायद ख़त्म करना  चाहते  थे  दर्द
आगे चलकर जो हमें सता ना सके

जुदाई  का डर था या बदनामी का
तभी  कर  कोई वो  खता ना सके

मिल जाते किसी अनजाने मोड़ पे
ऐसा कोई  वो हमें दे  पता ना सके

दिल  में तो  थी  बहुत  बातें  उनके
पर  न  जाने क्यों वो बता ना  सके