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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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Wednesday, February 7, 2018
दिल में तो थी बहुत बातें उनके
पर न जाने क्यों वो बता ना सके
किस बात की परवाह थी उनको
जो प्यार हमसे वो जता ना सके
शायद ख़त्म करना चाहते थे दर्द
आगे चलकर जो हमें सता ना सके
जुदाई का डर था या बदनामी का
तभी कर कोई वो खता ना सके
मिल जाते किसी अनजाने मोड़ पे
ऐसा कोई वो हमें दे पता ना सके
दिल में तो थी बहुत बातें उनके
पर न जाने क्यों वो बता ना सके
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