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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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Wednesday, February 7, 2018
चाहूं आज मैं पास तेरे आना
दे दे किस्मत तू कोई बहाना
हर पल तू क्यों देती मुझको
दर्द जुदाई का इक अनजाना
कर यत्न तू अब मिलन का
छोड़ दे अब यूँ मुझे सताना
आज ज़रूरत है उसको मेरी
ज़रूरी है पास उसके जाना
जब मैं हूँ सबकुछ उसका
फ़िर क्यों बना दिया बेगाना
खास दिन है ये उसका आज
जो मुझे साथ उसके मनाना
ए हवा तू ही दे दे साथ आज
पहुँचा दे मेरा खास नजराना
स्वीकार करो शुभकामनाएँ
और देदो मुझको माफीनामा
जन्मदिवस मुबारक हो मेरे बिना
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