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जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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Wednesday, February 7, 2018
हमसे मिलने की हर वजहें तुम
यूँ किस्मत पर न सब छोड़ा करो
कभी मिलने की सोचकर क़दम
आशियाने की और भी मोड़ा करो
नही चाहते आना गर दर पे हमारे
रास्तों को यूँ बीच न छोड़ा करो
कभी आ जाना यूँ टहलते टहलते
हम नही कहते की तुम दौड़ा करो
बनाते है मुश्किल से घर यादों का
साफ मना कर उसे न फोड़ा करो
मानाआना सम्भव नही तुम्हारा पर
हमारे रस्ते में तो न कोई रोड़ा करो
बड़ी मिन्नतोंसे करते हो कोई वादा
अपने किये वादे को न तोड़ा करो
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