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जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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जिंदगी तो है इक खेल निराला
अब ये खेल तो हमें खेलना है
माना कठिन समय आजकल
पर आगे तो इसको धकेलना है
पल पल क्यों बदलता रहता है
बिन मतलब के चलता रहता है
रोक न पाये कोई इसे कभी भी
हरदम क्यों ये मचलता रहता है
हो जाओ सब मजबूत साथियों
न जाने कितना और झेलना है
जिंदगी है............
मिल कर सब इसके साथ चलो
हाथो में डाल सब ये हाथ चलो
छोड़ के झगडे अपने अब तुम
डाल नाक में इसके नाथ चलो
हो जाये जिंदगी रंगीन सबकी
ऐसा रंग कोई तुम्हे उड़ेलना है
जिंदगी तो है......
चौंकें ये ऐसा कोई काम कर दो
ग़म सबके तुम मिलके हर दो
फैला दो खुशियाँ ही खुशियाँ
हर किसी की झोली ये भर दो
मुश्किल नही तुम्हारे लिये कुछ
करनी नही कोई अवेहलना है
जिंदगी तो है.......
जीवन है जैसा आगे बढाना है
नित नई मंजिल इसे चढ़ाना है
करके कुछ जतन आज ही इसे
आसमान तक अब यूँ चढाना है
कोई भी बहाना तुम्हे "उज्ज्वल "
इससे बचने का नही पेलना है
जिंदगी तो है........
जिंदगी तो है इक खेल निराला
अब ये खेल तो हमें खेलना है
माना कठिन समय आजकल
पर आगे तो इसको धकेलना है

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