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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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Thursday, December 15, 2016
तू ही रोशनी है ,तू ही चाँद है
खुदा से मेरा ,तू ही संवाद है
मैं तो ठहरा एक बंजर भूमि
तू ही उर्वरता , तू ही खाद है
हरपल रहती हो,इस दिल में
दूरी ही बस एक अपवाद है
सबसे है दोस्ती , तेरे कारण
किसी से न कोई विवाद है
तू ही है प्रार्थना रब से मेरी
तू ही भगवन का प्रसाद है
रोज़ " तू ही धड़के दिल में
तुझसे ही दिल ये आबाद है
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