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चलता रह तू ,चलता रह तू साथी रे
जीतेगा जहाँ, तू सिकंदर की भाँति रे
नाम हर जगह ,होता है विजेता का
गीत दुनियाँ , सिर्फ जीत के गाती रे
चलता रह तू............................
सच्चा प्रयास ,व्यर्थ कभी ना जाता रे
कोशिश वाला ,हर बार जीत जाता रे
होती है बिछड़न ,अपनो से थोड़ी सी
पर अंत में,सब कुछ है मिल जाता रे
लगती थी बिछड़न, जो तुझको बुरी
संग कामयाबी ,है बहुत वो सुहाती रे
चलता रह तू............................
है तेरे पासअब , हौंसले का भंडार रे
है साथ खड़ा , तेरे सारा परिवार रे
दूर नही है , कोई भी मंजिल तुझसे
है बढाना तुझे,क़दम बस एक बार रे
निडर होकर , चल पड़ता जो सीधा
कोई बाधा , उसको न रोक पाती रे
चलता रह तू...........................
जीत ले तू , जिंदगी की हर जंग रे
चाहे कोई न हो,अंत तक तेरे संग रे
अंधकार सा ,फैला है चारों और जो
भर दे अब,उसमे रंग बिरंगे तू रंग रे
माना उजड़ी सी , बंजर भूमि है ये
पर बंजर में ही , हरियाली आती रे
चलता रह तू...........................
होने वाला है , अद्भुत एक सवेरा रे
आने वाला समय ,बस होगा तेरा रे
ये है सबकुछ, तेरी मेहनत का फल
याद रखना , थोड़ा सहयोग मेरा रे
नही भूलना , किसी को 'उज्ज्वल '
संग हो अपने,खुशियाँ बढ़ जाती रे
चलता रह तू..........................
चलता रह तू ,चलता रह तू साथी रे
जीतेगा जहाँ, तू सिकंदर की भाँति रे
नाम हर जगह ,होता है विजेता का
गीत दुनियाँ , सिर्फ जीत के गाती रे
संजय किरमारा 'उज्ज्वल '

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