Popular Posts
-
जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
-
चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
-
छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
-
दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
-
अपना ग्रुप कौन रहेगा किस समूह में सब मन ही मन में रट रहे थे थे सब बैचेन यहाँ क्योंकि सब चार ग्रूप्स में बँट रहे थे किसको पता था कि इं...
-
गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
-
वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
-
हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
-
यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
About
Random Posts
Labels
News
Design
Pages
About Me
Popular Posts
-
जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
-
चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
-
छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
-
दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
-
अपना ग्रुप कौन रहेगा किस समूह में सब मन ही मन में रट रहे थे थे सब बैचेन यहाँ क्योंकि सब चार ग्रूप्स में बँट रहे थे किसको पता था कि इं...
-
गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
-
वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
-
हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
-
यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
चलता रह तू ,चलता रह तू साथी रे
जीतेगा जहाँ, तू सिकंदर की भाँति रे
नाम हर जगह ,होता है विजेता का
गीत दुनियाँ , सिर्फ जीत के गाती रे
चलता रह तू............................
सच्चा प्रयास ,व्यर्थ कभी ना जाता रे
कोशिश वाला ,हर बार जीत जाता रे
होती है बिछड़न ,अपनो से थोड़ी सी
पर अंत में,सब कुछ है मिल जाता रे
लगती थी बिछड़न, जो तुझको बुरी
संग कामयाबी ,है बहुत वो सुहाती रे
चलता रह तू............................
है तेरे पासअब , हौंसले का भंडार रे
है साथ खड़ा , तेरे सारा परिवार रे
दूर नही है , कोई भी मंजिल तुझसे
है बढाना तुझे,क़दम बस एक बार रे
निडर होकर , चल पड़ता जो सीधा
कोई बाधा , उसको न रोक पाती रे
चलता रह तू...........................
जीत ले तू , जिंदगी की हर जंग रे
चाहे कोई न हो,अंत तक तेरे संग रे
अंधकार सा ,फैला है चारों और जो
भर दे अब,उसमे रंग बिरंगे तू रंग रे
माना उजड़ी सी , बंजर भूमि है ये
पर बंजर में ही , हरियाली आती रे
चलता रह तू...........................
होने वाला है , अद्भुत एक सवेरा रे
आने वाला समय ,बस होगा तेरा रे
ये है सबकुछ, तेरी मेहनत का फल
याद रखना , थोड़ा सहयोग मेरा रे
नही भूलना , किसी को 'उज्ज्वल '
संग हो अपने,खुशियाँ बढ़ जाती रे
चलता रह तू..........................
चलता रह तू ,चलता रह तू साथी रे
जीतेगा जहाँ, तू सिकंदर की भाँति रे
नाम हर जगह ,होता है विजेता का
गीत दुनियाँ , सिर्फ जीत के गाती रे
संजय किरमारा 'उज्ज्वल '

0 comments:
Post a Comment