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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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Wednesday, March 30, 2016
आज तन्हाई की महाफिल जमी है
इसलिये शायद आँखों में नमी है
ज़रूरत है जिसकी सबसे ज्यादा
उसका पास न होना आज कमी है
नही है कोई वश उसपे मेरा कोई
तभी तो किये हुए थोड़ी नरमी है
सूना सा लगता सवेरा और संध्या
तन्हाई में ऐसा लगना लाज़मी है
मिलने वाली है मंज़िल "उज्ज्वल "
फ़िर क्यों मन में ये गहमागहमी है
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