Popular Posts

About

Random Posts

News

Design

Pages

Powered by Blogger.

Popular Posts

Thursday, December 17, 2015

हम तो ठहरे  आज़ाद पंछी
पहुँच जायेंगे अपने आशियाने
यूँ ही शाम  ढलते - ढलते

लक्ष्य ठहरा स्पष्ट हमारा
मिल जायेगी मंजिल हमें
यूँ ही यहाँ वहाँ चलते - चलते

कितनी टकरायेगी हमसे वो
थक जायेंगी सब मुश्किलें
राह में हमारे अड़ते - अड़ते

कितनी रोकेगी ये बाधायें
पार पा जायेंगे सबसे हम
बस यूँ ही हँसते - हँसते

मिलती है नाकामियां उन्हे
जो करते है हर काम
नाकामियों से डरते - डरते

नही है सहारे की कमी यहाँ
न जाने क्यों डरते है हम
विश्वास किसी पर करते - करते

थोड़ा सा क़दम बढ़ाओ
चलो मंजिल की और "संजू "
गले सबके यहाँ लगते - लगते

हम तो ठहरे  आज़ाद पंछी
पहुँच जायेंगे अपने आशियाने
यूँ ही  शाम  ढलते - ढलते

0 comments: