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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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Friday, December 4, 2015
चारों और पानी ही पानी
चारों और हानि ही हानि
चारों और अँधेरा ही अँधेरा
हो जाये अब जल्दी सवेरा
चारों और फैला हाहाकार
राहत उपायों का इंतजार
मदद को हर कोई तैयार
पर बाधा है मौसम की मार
आशा है दिल के कोने में
गंवाना नही हैं आँसु रोने में
कुछ ही पल बाकी हैं अब
ये मुशीबतो कम होने में
बहुत जल्द होगा यहाँ सवेरा
बीत जायेंगी ये अँधेरी रातें
फ़िर खिलखिलायेगी चेन्नई
फ़िर होगी मस्ती की बातें
सब कुछ हो जायेगा सामान्य
सुधर जायेंगी सब हालात-ए
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