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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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Thursday, September 24, 2015
रहने लगा हूं खामोश मैं
आके मुझे दुलार दे
नही लगता मन अब मेरा
मुझे अब अपना प्यार दे
मँझदार में है नैया मेरी
इसे अब कर पार दे
लड़ूं मन की उलझनों से
ऐसा कोई हथियार दे
भटक जाता है मन कई बार
इसे थोड़ी डाँट फटकार दे
बैठ जाऊँ मैं शांति से
चाहे एक दो थप्पड़ ही मार दे
थक गया हूं काम करते करते
मुझे वो बचपन वाला रविवार दे
नही भाता खाना होटल का
अपने हाथो का मिर्ची अचार दे
लगा दो मुझे रास्ते पे फ़िर
चाहे सुना दो चार दे
बन गया हूं भटकता पंछी
बैठने को कोई आधार दे
खूब तोड़ मरोड़ लिया है अब
मुझे कोई स्थाई आकार दे
बहुत देख लिये सपने "संजू "
कर किसी एक को साकार दे
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