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जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
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चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
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अपना ग्रुप कौन रहेगा किस समूह में सब मन ही मन में रट रहे थे थे सब बैचेन यहाँ क्योंकि सब चार ग्रूप्स में बँट रहे थे किसको पता था कि इं...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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हिन्द देश है तन हमारा
हिन्दी हमारी जान है
इसी से धड़कता है ये दिल
इसी से हमारा मान है !
रखती है हमें बांधकर
एक सुगंधित माला में
सीखते हैं हम सब कुछ
इसी की पाठशाला में
बढ़ता इससे बहुत ज्ञान है
इसी से.. . . . . . . . . . . .
रहती खुद टूटती फूटती
पर सबको जोड़ जाती है
पूर्व - पश्चिम,उत्तर - दक्षिण
इसलिये सबको ये भाती है
लाखों गुणों की ये खान है
इसी से . . . . . . . . . . . .
आओ हम सब मिलकर
कुछ इसका कर्ज चुकाए
करें समृद्ध इसे इतना
और अपना फर्ज चुकाए
जिससे भारतवर्ष महान है
इसी से . . . . . . . . . . . .
नही होगा अकेले - अकेले
सबको मिलकर कुछ करना है
जोडो " संजू " साथ सबको
प्रचार - प्रसार इसका करना है
बढ़ाना इसका फ़िर से मान है
इसी से . . . . . . . . . . . . . .
हिन्द देश हमारी पहचान है
हिन्दी हमारी जान है
इसी से धड़कता है ये दिल
इसी से हमारा मान है

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