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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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Tuesday, January 26, 2016
जालिम है ये जमाना
कर देते है दिल बेगाना पर
वतन से सुंदर कोई सनम नही
काम आये खून हमारा वतन पर,
इससे बढ़कर कोई मानव जन्म नही
अर्पित कर दो जान वतन वास्ते
इससे बढ़कर कोई सेवा नही
देखे है लोग इस ज़माने में
मरते पैसों से लिपटकर
लोगों की आँखो में
कभी दिखे नही
त्याग दो दोस्तों तुम
अब मोहब्बत कागजी
छोड़ दो तुम सब अफ़साने
कर देते है जो अपनो से बेगाने
छोड़कर अब ये दुनियाँ दिखावटी
करो मिलकर सब कोई जतन सही
बिखरी है खूबसूरती दुनियाँ में बहुत
मगर तिरंगे से बढ़कर न मिलेगा
कोई इससे सुंदर कफ़न कहीँ
देशभक्ति के रास्ते पर तुम
अपने क़दम बढ़ाओ
एक बार ही सही
संजय किरमारा
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