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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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दिल में तो थी बहुत बातें उनके पर न जाने क्यों वो बता ना सके किस बात की परवाह थी उनको जो प्यार हमसे वो जता ना सके शायद ख़त...
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अपना ग्रुप कौन रहेगा किस समूह में सब मन ही मन में रट रहे थे थे सब बैचेन यहाँ क्योंकि सब चार ग्रूप्स में बँट रहे थे किसको पता था कि इं...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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न जाने क्यों
ये इंशा बदल रहा है
रहता था जो हंसमुख सदा
एक अलग सी खामोशी में
बंधता ही जा रहा है
रहता था तरोताजा हरदम
अच्छे अच्छे विचारों से
आज उसी ताजगी को
वो खोता ही जा रहा है
हँसता भी है गर वो
तो दिखावा सा ही होता है
न हिलते है होंठ
न चमक आती है आँखों में
सैर पर जाता है तो भी
पैरों में ही होती है हलचल
खुद तो फोन पर न जाने किस
तनाव में खोया रहता है
खा लेता है खाना कभी कभी
परिवार संग बैठकर,
पर तब भी के तन ही होता है
मौजूद खाने की मेज पर
आता है काम से लौटकर
तब भी टूटा सा ही होता है
मुश्किल से पकड़ पाता है घर
आता है दुनियाँ से हारकर
नही आती है नींद
बचपन के खर्राटों वाली अब
गुजर जाती है रात भी
यूँ ही करवटें बदल बदलकर
समझ नही आया "संजू " कि
किसने बाँध रखा है उसकी हँसी को,
उसके पुराने जोश को
कहने को तो वो
कामयाब ही कामयाब होता जा रहा है
पर अपने चंचल मन की मस्ती
और अपनी खुद की हस्ती
सबको खोता ही जा रहा है

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