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जीविका निर्वाह की व्यस्तता में हम कुछ इस तरह खो गये कि हम लौहडी और संक्राति जैसे त्योहारों को भूल गये नही याद आयी वो तिलों वाली रेबडिय़...
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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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वो सात दिन किसी कोने में है मेथ मेजिक तो किसी कोने में है लुकिंग अराउंड क्या उत्सव है आवडी में आज हर कोने से आ रहा है अजीब साउंड कुछ को...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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Monday, August 10, 2015
पुराने दोस्तो की याद मे और जीवन की व्यस्तता के बीच यार अनमुल्लो के लिये छोटा सा प्रयास 🙏🙏🙏
थक चुके है अकेले बैठकर
क्यों न आज पुराने दोस्तों के,
दरवाज़े खटखटाते हैं;
दिखता नही है कोई आजकल
देखते हैं उनके पँख थक चुके है,
या अभी भी फड़फड़ाते हैं;
रहते है परेशान हम,उनको देखते है
हँसते हैं खिलखिलाकर,
या होंठ बंद कर मुस्कुराते हैं;
उलझन भरी जिंदगी मे वो
बता देतें हैं सारी आपबीती,
या सिर्फ सक्सेस स्टोरी सुनाते हैं;
भूल गये है हमे या
हमारा चेहरा देख वो,
अपनेपन से मुस्कुराते हैं;
बैठते है वो चैन से साथ हमारे
या घड़ी की और देखकर,
हमें जाने का वक़्त बताते हैं ।
बन गये है स्वार्थी है अकेले
रह - रहकर " संजू " क्यों न
आज फ़िर कुछ पुराने दोस्तों के,
दरवाज़े खटखटाते हैं...
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