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गुमनाम चेहरा गुमनाम सा चेहरा हूँ अभी तक यहाँ तभी तो किसी को भी मैं न दिखता हूँ नादां सा हूँ इस दुनियाँ में अभी तक तभी तो किसी ...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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लड़ता रह राही तू ,इस उलझे हुए संसार में नही मिलने वाली कोई मंजिल एक बार में कश्ती है तेरी और तुझे ही चलानी ये अब नही तो दुनियाँ डुबो ...
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हर रोज़ दुनियाँ बदलने की सोच लेता हूँ मैं पर अब तक क्यों खुद को न बदल पाया हूँ बन चुका हूँ कितना नादां मैं ,किसको बदलू रोशनी है दु...
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Monday, August 10, 2015
तुम्हारे ख्वाबो को हकीकत में,
मैं सजाना चाहता हूं ,
चलते रहना साथ हमारे,
तुम्हे जन्नत दिखाना चाहता हूं
बैठा के नजरो के सामने
जी भर देखना,
कभी नज़रे मिलाना कभी
नज़रे और नजारे चुराना चाहता हूं
खता हमसे होने पर
गर रूठ जाओ तुम
तो सुनाके प्यारी पंक्तियां
तुम्हे मनाना चाहता हूं
बैठकर आमने सामने
किस्सा कोई प्रेम का
सुनने को तुमसे और
तुम्हे सुनाना चाहता हूं
थी खताये और गलतफहमियां
हमारे बिच जितने भी"संजू "
पास बैठकर उन
सबको भुलाना चाहता हूं
तुम्हारे ख्वाबों को हकीकत में,
मै सजाना चाहता हूं,
चलते रहना साथ हमारे,
तुम्हे जन्नत दिखाना चाहता हूं !
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