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चार कामों हम थोड़े क्या उलझ गये तुम ही मुझको बेपरवाह समझ गये तुम ही तो मेरे आदर्श और सहारा थे फ़िर तुम्हारी नज़र में क्...
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यात्रा वृतांत :- मेसूर एक बार फ़िर कुछ भी लिखने से पहले मैं एक अनुभव सांझा करना चाहूंगा जो मैंने कई संगठनो में कार्य करते हुए महसुश किया है ...
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नेक राह चलना आसान नही थी राह इस दुनियादारी में कभी मिली है ये मंज़िल चलके कितने तूफानों पर खूब तपाया है इस लोहे को सोना बनाने को कैस...
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छोड़ ख़ामोशी आज बोल ही पड़ा आखिर सूना पड़ा वो तालाब कहाँ रहते हो जनाब ? ? ? आते नही हो छलाँग लगाने कर के घरवालों से नये ...
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उस पल का इंतजार है
आजकल जो कुछ चल रहा है उसमे देखने में आता है कि आप किसी को कंकड़ मारो तो बदले में आपको सौ प्रतिशत प्रतुत्तर में पत्थर मिलता है ,इसी प्रकार किसी को गाली दो तो उससे भी बुरी गाली आपको सुननी पड़ती है या फ़िर किसी की थोड़ी सी बुराई करके देखो । तो उसके बदले आपकी बुराइयों का ढेर न लग जाये तो कहना ।
मतलब ये हुआ कि आप जो दूसरों को देते है ,दुनियाँ आपको सूद समेत वापिस करती है ।
मगर इसका एक दूसरा पहलू भी है । जब आप किसी में विश्वास करते हो तो ज़रूरी नही कि आपको वापिस विश्वास ही मिलेगा , यहाँ आपको धोखा भी मिल सकता है । आप किसी से अच्छा व्यवहार करो तो ज़रूरी नही कि सामने वाला भी आपसे अच्छा व्यवहार करे ।
इस तरह कि पारिस्थिति मनुष्य को तोड़ देती है । इसलिये मुझे इस समय के बदलने का इंतजार है जब हमें प्यार के बदले प्यार मिले और सच्चाई के बदले सच्चाई

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